Tuesday, 16 June 2020

कृष्ण जन्माष्टमी कृष्ण अवतार के रोचक तथ्य


हिंदू धर्म की मान्यता अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनाते हैं इस पर्व को मनाने के पीछे बहुत से तर्क हैं स्कंद पुराण में इस दिन व्रत ना करने वाले को जंगल का सर्प और भविष्य पुराण में क्रूर राक्षस बताया गया है और एक मतानुसार इस दिन व्रत करने पर 3 जन्मों के पापों का विनाशक  बताया है !

लेकिन यह सब पवित्र गीता और चारों वेद से परे की बात है क्योंकि जिस समय कृष्ण अवतार हुआ था उस समय किसी भी पुराण उपनिषद और शास्त्र की उत्पत्ति नहीं हुई थी यह केवल मन मुखी विचार है क्योंकि बहुत से विद्वानों ने भी बताया है की जो बातें वेदों और पवित्र गीता से मेल नहीं खाते वह केवल लोक वेद है अर्थात दंत कथाएं l🙈

"तो आइए कृष्ण जी के अवतार के बारे में कुछ विस्तार से जानते हैं".  --->>👴👴👴👴
एक बार जब नारद जी विष्णु जी से अपमानित होने के कारण उन्हें श्राप देते हैं तो उसके फल स्वरुप विष्णु जी त्रेता युग में श्री रामचंद्र जी के रूप में अवतार लेते हैं और जब दशरथ पुत्र रामचंद्र जी बाली का वध करते हैं तो बाली के पूछने पर राम जी ने बाली के वध का बदला चुकाने के लिए द्वापर में श्री कृष्ण जी के रूप में अवतरित होना बताया था|
इस प्रकार श्री कृष्ण जी का जन्म द्वापर में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रात्रि 12:00 बजे उनके कंस मामा के निवास स्थित जेल में हुआ
उसी दिन को "जन्माष्टमी" के रूप में मनाते हैं और फिर कृष्ण जी के अंतिम समय में उन्हें एक मछुआरे द्वारा जहरीले तीर से मारा गया जो कि बाली का बदला था और साथ में 56 करोड़ यादव उनकी आंखों के सामने कटकर मर गए और वे उन्हें बचा न सके.

अब यहां सोचने वाला तथ्य यह है कि कि खुद विष्णु जी ,श्री कृष्ण  जी और श्री रामचंद्र जी कर्म बंधनों में बंधे हुए हैं सरदार जी किस प्रकार मनुष्य पाप और पुण्य को भोक्ता है उसी प्रकार यह भी भोंकते हैं तो क्या यह इन्हें परमात्मा का दर्जा दिया जा सकता है !!

"वेदों और पवित्र गीता" के अनुसार यह संभव नहीं है
 क्योंकि परमात्मा अजर,अमर और अविनाशी है जो कि कर्म बंधनों जीवन मृत्यु और श्राप से मुक्त है

कबीर, राम कृष्ण अवतार हैं, इनका नाहीं संसार।
जिन साहब संसार किया, सो किनहु न जनम्यां नार ll

उपर्युक्त पंक्तियों से आते हैं कि रामचंद्र जी और कृष्ण जी विष्णु जी के अवतार है और इनसे अलग पूर्ण परमात्मा  जिन्होंने समस्त सृष्टि का निर्माण किया है  उनका जन्म व मृत्यु नहीं हुआ और ना ही वे किसी कर्म बंधनों से अधीन है
अतः यह सिद्ध होता है कि परमात्मा इनसे कोई अन्य है जिनका उल्लेख हमारे पवित्र ग्रंथ और वेद और गीता में हुआ है


जिनके लिए  पवित्र गीता जी को बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा का पूर्ण ज्ञान व भक्ति विधि मैं नहीं जानता। अध्याय 15 श्लोक 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 व 66 में किसी अन्य परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है।(इसका सार यह है कि तत्वदर्शी संत की खोज करो और जैसे भक्ति विधि वह बताए उसी अनुसार करते हुए मोक्ष को प्राप्त हो जाओगे |
और वह तत्वदर्शी संत की पहचान गीता जी ध्याये 15 के श्लोक 1 से 3 में बताई गई है |
और
पवित्र गीता अध्याय 9 के श्लोक 20, 21 में कहा है कि जो मनोकामना(सकाम) सिद्धि के लिए मेरी पूजा तीनों वेदों में वर्णित साधना शास्त्र अनुकूल करते हैं वे अपने कर्मों के आधार पर महास्वर्ग में आनन्द मना कर फिर जन्म-मरण में आ जाते हैं अर्थात् यज्ञ चाहे शास्त्रानुकूल भी हो उनका एक मात्र लाभ सांसारिक भोग, स्वर्ग, और फिर नरक व चौरासी लाख योनियाँ ही हैं।

जब तक तीनों मंत्र जो कि पवित्र गीता के 17 अध्याय श्लोक 23 में वर्णित है( ओम तथा तत् व सत् सांकेतिक) पूर्ण संत से प्राप्त नहीं होते।
और वर्तमान में इन तीनों मंत्रों जो कि गीता जी अध्याय 17 के श्लोक 23 में वर्णित है को कबीर परमेश्वर के रूप में अवतरित संत रामपाल जी महाराज की दे सकते हैं केवल वही पूरे विश्व में एकमात्र अधिकारी तत्वदर्शी संत है अधिक जानकारी के लिए उनकी वेबसाइट पर विजिट करें
Www.supremegod.org

                     धन्यवाद 🙏🙏🙏

              मिलते हैं अगले ब्लॉग में💪✌🏻

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