Wednesday, 13 May 2020

"मानवता का ह्रास"

मानव पिछले कुछ दशकों से विकास के साथ-साथ अकूत संपत्ति की अंधाधुंध दौड़ में पागल सा हो गया है जिस कारण वह है सामाजिक लगाव और पारिवारिक संबंधों से बहुत दूर जा चुका है और अत्यधिक तनाव में ग्रसित होने लगा है  मस्तिष्क के करोड़ टन से भी अधिक वजनी तनाव और अवसाद से छुटकारा पाने के लिए या तो वह है किसी चिकित्सक की सहायता लेता है अन्यथा 80% मामलों में भयानक नशे का सहारा लेते हैं जिस कारण आज पूरे विश्व में सबसे अधिक लोग नशे का शिकार है और नशे की इस बुरी लत ने राक्षस बना दिया है जिसके कहीं उदाहरण हम दिन प्रतिदिन समाचार पत्रों में देखते हैं
नशे रूपी राक्षस का सर्वनाश करने के लिए देश-विदेश में बहुत सी सरकारी संस्थाएं और प्राइवेट संस्थाएं कार्यरत है जो अथक प्रयास कर रही है कि इस राक्षस रूपी नशे को समाप्त किया जाए और मानव समाज को एक नई दिशा प्रदान की जाए
नशे को समाप्त करने के विरुद्ध इस महा अभियान में देश की छोटी-छोटी संस्थाएं और एनजीओ घर घर जाकर और नुक्कड़ नाटक द्वारा लोगों को जागरूक कर रहे हैं


सरकारी तथा बहुत सी संस्थाएं दशकों से प्रयासरत है कि नशा मुक्त समाज की स्थापना हो लेकिन इनके द्वारा किए गए प्रयास ज्यादा कारगर नहीं हो पा रहे हैं हमें वैज्ञानिक तथा मेडिकल साइंस के अलावा अध्यात्मिकता में भी नशे से मुक्ति का हल खोजना चाहिए बहुत से संत हैं जो इस मुहिम में कार्य कर रहे हैं जैसे संत रामपाल जी महाराज द्वारा नाम दीक्षा लेने वाले समस्त अनुयाई नाम दिक्षित होने के बाद ता जिंदगी कभी भी नशे को छूते भी नहीं है यह विश्लेषण मन मुखी ना होकर ग्राउंड रिपोर्ट द्वारा तैयार किया हुआ है हम तो यही आशा कर सकते हैं की संत हो चाहे भगवान इस बुराई का अंत होना ही चाहिए और होना ही चाहिए
धन्यवाद

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