पृथ्वी पर जब से मानव सभ्यता का उदय हुआ है, तब से मानव विकास की इस अनवरत दौड़ में भागता ही पाया है| वर्तमान तक मानव सभ्यता के विकास के लिए प्रयत्नशील है क्या यह विकास, भौतिकता ही मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य हैं? या अन्य,
ऐसे अनेकों विचार आपके हृदय में उमड़ते रहे होंगे लेकिन जब मानव सभ्यता का विकास शुरू हुआ था और वर्तमान समय कि मानव का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो मानव अपनी इस विकास की दौड़ में खुद को भूल सा गया है क्या मनुष्य वैज्ञानिक तरीकों से ही जीवित रह सकता है या आध्यात्मिकता से
दोनों प्रकार के सवाल अपनी-अपनी जगह सही है लेकिन हृदय की असीम गहराइयों से सोचने के पश्चात दिमाग यह सोचने पर मजबूर होता है कि यह सब वैज्ञानिक या भौतिकवाद से परे चीजें हैं अर्थात आध्यात्मिकता का भी अपना महत्वपूर्ण स्थान है अतः सभी भौतिक वस्तुओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी देखना जरूरी है, क्या पता यही मनुष्य की अंतिम मंजिल हो
धन्यवाद

No comments:
Post a Comment